अधिकारों की रक्षक है रिट- एडवोकेट विवेक जैन
ग्वालियर। मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित माधव विधि महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय वेबीनार के दूसरे दिन एडवोकेट विवेक जैन  ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजा अगर राजधर्म का पालन न करे तो जनता के पास उपचार का होना आवश्यक है वर्तमान में रिट के माध्यम से जनता के अधिकारों की रक्षा की जाती है। उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी विभिन्न रिटो से न्यायालय जनता के अधिकारों की रक्षा करते हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 32 के अंतर्गत, अधिकार प्रच्छ परमादेश, बंदी प्रत्यक्षीकरण, उत्प्रेषण एवं प्रतिषेध रिट जारी की जाती है लेकिन रिट क्षेत्राधिकार के संबंध में उच्च न्यायालय के पास उच्चतम न्यायालय से भी ज्यादा अधिकार है चुकी उच्च न्यायालय किसी अन्य विषय पर भी रिट जारी कर सकता है।

न्यायालयों द्वारा अधिकार की रक्षा के लिए अलग-अलग रिट जारी की जाती है। रिट का फायदा यह है कि इसमें साक्ष्य नहीं कराने होते। हाई कोर्ट रिट जारी कराने से मना भी कर सकता है यदि आपके पास अन्य कोई उपचार प्राप्त है।

वेबीनार में अतिथि परिचय प्राचार्य डॉ नीति पांडेय द्वारा किया गया। स्वागत भाषण शासी निकाय सदस्य एडवोकेट  विवेक खेड़कर  द्वारा दिया गया। आभार प्रदर्शन शासी निकाय अध्यक्ष एडवोकेट श्री प्रवीण नेवासकर जी द्वारा दिया गया।वेबीनार का संचालन प्रोफेसर भारतेन्दु चौधरी द्वारा किया गया। वेबीनार में समस्त महाविद्यालय स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।